सामान्य जन-जीवन में हिंदी दिवस की विशेष पहल नहीं होती है यद्यपि हिंदी भाषा का दैनिक जीवन में उपयोग जारी रहता है। हिंदी दिवस एक त्यौहार बन चुका है जिसे पूरे उत्साह से केंद्रीय कार्यालय, राधट्रीयकृत बैंक और उपक्रम प्रतिवर्ष 14 सितंबर को मनाते हैं। भारतीय अन्य सार्वजनिक त्यौहारों और पर्वों की तरह हिंदी दिवस की तैयारियां होती हैं। इस तैयारी का प्रमुख और एकमात्र दायित्व उक्त वर्णित कार्यालयों के हिंदी विभाग/ राजभाषा विभाग पर निर्भर करता है। हिंदी अधिकारी/ राजभाषा अधिकारी पिछले वर्ष की हिंदी दिवस आयोजन की फ़ाइल खोलते हैं और उसके आधार पर आयोजनों की रूपरेखा बनाते हैं।
हिंदी दिवस आयोजन का मूल उद्देश्य यह है कि कार्यालय में कार्यरत अधिकारी और कर्मचारी अपना अधिक से अधिक काम हिंदी में करें अर्थात न केवल बातचीत में हिंदी भाषा का प्रयोग करें बल्कि कार्यालय के पत्राचार, ई/मेल आदि में भी हिंदी का अधिक से अधिक प्रयोग करें। हिंदी दिवस के आयोजन हिंदी प्रयोग को प्रोत्साहित करने ले लिए ही आयोजित किये जाते हैं। इस आयोजन में हिंदी वाद-विवाद, हिंदी संभाषण, राजभाषा प्रश्नोत्तरी, हिंदी या बहुभाषी गायन, हिंदी लेखन आदि प्रतियोगिताएं प्रमुख होती हैं। यह सब पढ़कर यह प्रतीत होता है कि उद्देश्य के अनुरूप अच्छे आयोजन हैं। इसी तरह का नोट बनाकर राजभाषा विभाग उच्चाधिकारी से आर्थिक व्यय की।अनुमति प्राप्त करता है। प्रायः उच्चाधिकारी जो सामान्यतः महाप्रबंधक होते हैं उन्हें हिंदी विकास प्रक्रिया की अच्छी जानकारी नहीं होती है और वह यह जानते हैं कि जब से कार्यालय में कार्य करना आरंभ किये हिंदी दिवस मनाया जाता है और हिंदी दिवस आयोजनों के व्यय को स्वीकृति प्रदान कर देते हैं। हिंदी दिवस के आयोजन हिंदी माह, हिंदी पखवाड़ा या हिंदी सप्ताह के रूप में विभिन्न कार्यालय मनाते हैं।
क्यों लिखा जा रहा है हिंदी दिवस पर ? वर्षों से असंख्य लेख आदि हिंदी दिवस आयोजन पर लिखे जा चुके हैं फिर से वही राग लेखन में छेड़ने का उद्देश्य क्या है? ऐसे अनेक प्रश्न उन विद्वजन के मस्तिष्क में उभर सकता है जो इस लेख तक पहुंच पाए हैं। पहुंच पाना ही हिंदी दिवस की एकमात्र प्रक्रिया है। इस विषयक जो अवगत नहीं हैं उन्हें यह जानकर आश्चर्य होगा कि हिंदी तक उक्त वर्णित कार्यालयों के स्टाफ नहीं पहुंचते, कभी नहीं पहुंचे है यदि पहुंचने का प्रयास है मात्र हिंदी का संघर्ष है। यहीं पर आकर भारत सरकार की संघ की राजभाषा नीति अटक गई है और प्रयोग करनेवाला हिंदी भाषा के प्रति उदासीन है जबकि हिंदी भाषा स्टाफ के टेबल पर दस्तक दे रही है कि उसे अपनाओ। हिंदी भाषा की दस्तक उक्त वर्णित कार्यालयों में इतनी धीमी और हतोत्साहित होती है कि पूरे वर्ष अपने अस्तित्व प्रदर्शन के लिए प्रयासरत रहती है। हिंदी दिवस आते ही उक्त कार्यालयों में हिंदी प्रमुखता से अपने अस्तित्व का प्रदर्शन करने में सफल होती है।
हिंदी दिवस का आगमन सेवानिवृत्त हिंदी/राजभाषा अधिकारियों, हिंदी कवियों, हिंदी लेखकों आदि के लिए भी महत्वपूर्ण हैं। कभी किसी आयोजन की अध्यक्षता, कभी आयोजित कवि सम्मेलन में आमंत्रित कवि का न्यौता, कभी हिंदी या राजभाषा पर संबोधन आदि के लिए कार्यालय से इतर लोगों को भी सम्मिलित किया जाता है जहां से मान-सम्मान की प्राप्ति होती है। हिंदी दिवस के उपलक्ष्य में आयोजित विभिन्न कार्यक्रम उक्त कार्यालयों में राजभाषा कार्यान्वयन के महत्व को बनाए हुए हैं।
धीरेन्द्र सिंह
09.09.2026
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