बुधवार, 9 सितंबर 2026

कहानी का अर्थ, अर्थ की कहानी

जीवन के हर बढ़ते कदम से एक नई कहानी बनती है। यह कहानियां कुछ क्षणिक होती है तो कुछ मानस पटल पर अंकित हो जाती है। प्रत्येक व्यक्ति अनेक कहानियों का जाल समेटे रहता है पर कुछ व्यक्ति ही कहानी लिख पाते हैं। यही कारण है कि जो कहानियां जनमानस के जीवन से तालमेल रखती है उस कहानी की लोकप्रियता तदनुसार बढ़ती है। यहां प्रश्न यह उठता है कि कहानी में भाव प्रमुख है या वर्णित कथ्य अपनी विशिष्टता रखता है। आजकल के हिंदी लेखन पर यदि गौर किया जाए तो प्रतीत होता है कि कहानियां लिखी नहीं जा रही हैं बल्कि गढ़ी जा रही हैं एक कुम्हार की तरह।

आजकल अधिकांश कहानियों में भाव नहीं मिलते बल्कि घटनाएं मिलती है। घटनाओं के भाव को उबारने के लिए लेखन कौशल की आवश्यकता होती है जो साहित्य पठन, आत्मिक मनन संग निरंतर लेखन से निखरती है। शब्दों की अर्थछटा और संवाद में युक्तिपरक, सूक्तिपरक वाक्य लेखन को मोहक बनाते हैं। मोहक कहानी में पाठक अर्थ नहीं भाव ढूंढते हैं। कहानी का अर्थ तो एक रिपोर्टिंग जैसा होता है। रचनाकार जब कथानक में पूरी तरह से डूब जाता है और बिना मस्तिष्क पर जोर दिए उन्मुक्त और सहज भाव से रचना लिखता है तो वह कहानी पाठक के हृदय को छूती है। कहानी में यदि भाव देखा जाए तो अर्थ स्वतः स्पष्ट हो जाता है।

अर्थ की कहानी का चलन हिंदी में तेज गति से सक्रिय है। यहां यह कहना गलत नहीं होगा कि हिंदी कहानी के कथानक में आजकल एकरूपता की लहर चल रही है। कहानियां महानगरों तक सिमट गई हैं जिसमें पारिवारिक रिश्तों की ही धमक है। इस प्रकार के एकरूपीय कथानक से अलग-अलग शब्द लिए लगभग एक ही भाव की कहानियां लिखी जा रही हैं। इस विधा में लघु कथा लेखन में इतना भटकाव आया है कि एक हल्के से प्रसंग को लघु कथा में बयान किया जाता है जिसमें अधिकांश लघु कथाएं सपाट लेखन होती है। बात अर्थ की कहानी की हो रही है जिसमें हिंदी से इतर लिखी गयी कहानियों के कथानक, शिल्प, सम्प्रेषण और अभिव्यक्ति चुराकर भी कहानियां लिखी जा रही हैं और पुस्तक प्रकाशित कर बेची भी जा रही हैं। अर्थोपार्जन में इस तरह की कहानियों की प्रमुख भूमिका है यद्यपि वर्तमान में हिंदी लेखन अर्थ के लिए संघर्ष करते नजर आ रहा है।

यह सत्य है कि फेसबुक, प्रतिलिपि आदि में कहानियां खूब लिखी जा रही हैं। इस प्रकार के लेखन में विभिन्न प्रकार के रचनाकार जुड़े हैं जिसका विश्लेषण कर यह प्रबल संकेत उभरता है कि हिंदी में कहानी लिखने का एक ऐसा दौर चल रहा है जिसमें हिंदी कहानी लेखन अपना मौलिक रूप लेकर लिखरेगी।

धीरेन्द्र सिंह

10.09.2026

08.54



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